क्यूँ तन्हा से हो गए हैं तेरे जाने के बाद।
छाव ठंडी ही दूंगा, बेशक पत्तो में कड़वाहट हो गई…!
वही बिछड़ के कह रहा है तुम तो खुश हो ना…!
जज़्बात जब काग़ज़ पर उतारे तो पता चला—
इस शहर में जीने के अंदाज़ भी क्या निराले हैं,
मोहब्बत में हार कर भी तुझे याद करता हूँ,
लड़कों का दर्द हमेशा छुपा रहता है नज़रों पर।
अकेलेपन पर शायरी लिखने के लिए अपने दिल की तन्हाई, खामोशी और दर्द को सरल शब्दों में व्यक्त करें।
ज़िंदगी के दरख़्त पर कुल्हाड़ी के वार हैं…!
क्योंकि उसे पता है— लोग हँसते हैं लड़कियों के दर्द पर भी।
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फिक्र वो करे जिनके गुनाह परदे में हैं…!
अक्सर मेरा ख्याल तुम्हें भी सताता होगा
बहुत उदास करती हैं मुझको निशानियाँ तेरी.